नदी

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नदी

नदी-किनारे बसे नगरों को देखकर
मैं यह मानने लगा हूं कि 
नदी स्त्री है और नगर पुरुष 
नदी उसे बसाती है 
नगर उसे भोगता है, दुहता है 
तकरीबन उसके देहान्त तक 
तब भी अतृप्त-अशांत ही रहता है..

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