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Dr Rajni Raman Jha
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बाण लगा है कृष्ण के पाँव में। अपने समय का सबसे बडा चिन्तक, कूटनीतिज्ञ और…

Dr Rajni Raman Jha
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वह हिरण्मय है वह ज्योतिर्मय है वह मुझमें विराजमान है तो “मैं” इतना तमोमय क्यों…

Devanshu Jha
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नदी नदी-किनारे बसे नगरों को देखकर मैं यह मानने लगा हूं कि नदी स्त्री है…

Devanshu Jha
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पद्मावत के बहाने एक बार फिर…. लड़-लड़ जो रण बाँकुरे, समर, हो शायित देश की…

Devanshu Jha
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घर मेरे घर का आँगन अपनी आँखें मलता हुआ नींद से जागा है अभी और…

Devanshu Jha
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जब छूट जाता है अपना गांव-घर तब हम समझते हैं कि छूटी है पुरानी डगर …

Devanshu Jha
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अद्धा खींचने के बाद जब बैठ गईं बिरजू की आंखें गुटखा खोलकर उसने तुलसी मिलाई…

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